ख्वाहिशों से नहीं गिरते फूल झोली में,
कर्म की शाख को हिलाना होगा ।
कुछ नहीं होगा कोसने से अँधेरे को,
अपने हिस्से का दीया खुद ही जलाना होगा ।
सत्य को कहने के लिए किसी,
शपथ की जरूरत नहीं होती।
नदियों को बहने के लिए किसी,
पथ की जरूरत नहीं होती।
जो बढ़ते हैं जमाने में,
अपने मजबूत इरादों के बल,
उन्हें अपनी मंजिल पाने के लिए,
किसी रथ की जरूरत नहीं होती।