रात गुमसुम हैं मगर चाँद खामोश नहीं,
कैसे कह दूँ फिर आज मुझे होश नहीं;
ऐसे डूबा तेरी आँखों के गहराई में आज,
हाथ में जाम हैं,मगर पिने का होश नहीं ! 
ए पलक तु बन्द हो जा,
ख्बाबों में उसकी सूरत तो नजर आयेगी;
इन्तजार तो सुबह दुबारा शुरू होगी,
कम से कम रात तो खुशी से कट जायेगी !
जो कोई समझ सके वो बात हैं हम,
जो ढल के नयी सुबह लाये वो रात हैं हम;
छोड़ देते हैं लोग रिश्ते बनाकर,
जो कभी न छूटे वो साथ हैं हम !

Sukun milta hai jab unse baat hoti hai,
Hazar raaton mein wo ek raat hoti hai;
Nigah uthakar jab dekhte hain wo meri taraf,

Mere liye wohi pal poori kaaynat hoti hai.